ध्वनि( Sound)
● ध्वनि
● ध्वनि ऊर्जा का ही एक रूप है जो विभिन्न वस्तुओं के कंपन करने से उत्पन्न होता है
●ध्वनि तरंग के संचरण में माध्यम के कण आगे नहीं पड़ते बल्कि बरन विक्षिभ ही संचरित होता है।
● ध्वनि का गमन निर्वात में नहीं होता इसके संचरण के लिए सत्तत द्रव्यमान माध्यम का होना आवश्यक है
◆ तरंग दो प्रकार की होती है-------
● यदि तरंग संचरण के क्रम में माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा में होता है तो वह सी तरंग को अनुदैर्ध्य तरंग कहते हैं।
जैसे- गैस तथा हवा में ध्वनि तरंग।
● यदि तरंग संचरण के क्रम में माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण के लंबवत हो तो वैसी तरंग को अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं।
जैसे- प्रकाश तरंग
● ध्वनि तरंग की प्रकृति अनुदैर्ध्य तरंग होती है।
● किसी तरंग गति में वह न्यूनतम दूरी जिस पर किसी माध्यम का घनत्व यादव आवर्ती रूप से अपने मान की पुनरावृति करता है तरंग का तरंगदैर्ध्य कहा जाता है । इसे लैम्डा द्वारा सूचित किया जाता है इसका si मात्रक मीटर(m) होता है ।
● किसी माध्यम में घनत्व के एक दोलन पूरा होने में लगे समय को ध्वनि तरंग का आवर्तकाल कहते हैं इसे T से निरूपित करते हैं। इसका si मात्रक सेकंड (s)होता है।
● किसी स्थान पर माध्यम के घनत्व का इकाई समय में दोलन करने की संख्या को ध्वनि तरंग की आवृत्ति कहते हैं इसे (v)न्यू से निरूपित करते हैं इसका si मात्रक हर्ट्ज(Hz) होता है।
● यदि ध्वनि की चाल (u) तथा आवृत्ति(v) तथा तरंग द्रव्य को हम (k)मान ले तो उनके बीच में संबंध
u=vk
जहां k= लैम्डा , v= आवृत्ति, u= ध्वनि तरंग की चाल
● विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल भिन्न भिन्न होती है और यह माध्यम के ताप पर निर्भर करती है माध्यम का ताप बढ़ने से ध्वनि की चाल बढ़ती है।
● तारत्व , प्रबलता तथा गुणता ध्वनि के ऐसे लक्षण है जो ध्वनि तरंग के गुणों द्वारा निर्धारित होते हैं।
● 1 सेकंड में किसी इकाई क्षेत्रफल से गुजरने वाला ध्वनि ऊर्जा को ध्वनि की तीव्रता कहते हैं।
● प्रकाश किरणों जैसा ही ध्वनि का परावर्तन होता है और धोनी भी प्रकाश के लिए परावर्तन के नियम का पालन करती है।
● मनुष्य द्वारा सुनी गई ध्वनी का प्रभाव उसकी मिस्तष्क पर लगभग 1/15 सेकंड तक रहता है इसे श्रुति निर्बंध कहते हैं।
● किसी विस्तृत अवरोध से ध्वनि परिवर्तित होकर उसे पुणे सुने जाने की घटना को प्रतिध्वनि(echo) कहते हैं
● स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनाई पड़ने के लिए धोनी का प्रवर्तक करने वाले सतह से श्रोता को कम से कम 11 मीटर की दूरी पर होना आवश्यक है।
● मनुष्य के लिए श्रव्य परास(Rang of hearing) के पास 20Hz से 20000Hz के बीच रहता है|
● किसी विस्तृत अवरोध से ध्वनि परिवर्तित होकर उसे पुणे सुने जाने की घटना को प्रतिध्वनि(echo) कहते हैं
● स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनाई पड़ने के लिए धोनी का प्रवर्तक करने वाले सतह से श्रोता को कम से कम 11 मीटर की दूरी पर होना आवश्यक है।
● मनुष्य के लिए श्रव्य परास(Rang of hearing) के पास 20Hz से 20000Hz के बीच रहता है|


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