बल तथा गति के नियम ( force and low of motion)
● वस्तु की अपनी विराम की अवस्था अथवा सरल रेखा में एक समान गति की अवस्था बनाए रखने की प्रवृत्ति को जड़त्व(inertia) कहते हैं।
● किसी वस्तु का द्रव्यमान(mass) उसके जड़त्व की संख्यात्मक माफ है।
● बल (force)वह कारक है जो किसी वस्तु पर लग कर उसमें त्वरण उत्पन्न करता है।
● बल को परिमाप और दिशा दोनों होती है अर्थात बाद एक सदिस राशि है।
● बल या बलो का समूह किसी बस्तु पर लग कर
(a)उसके चाल में परिवर्तन ला सकता है।
(b) उस वस्तु की गति की दिशा में परिवर्तन ला सकता है।
(c)उस वस्तु की आकृति (shape)सकता है।
● किसी कण पर लगे हुए दो या दो से अधिक बालों का परिणामी बल वह बल है जिसका उस कण पर प्रभाव दिए हुए पलों के सम्मिलित प्रभाव के समान होता है।
● यदि बलों का एक समूह किसी वस्तु पर लगकर उसमें कोई त्वरण उत्पन्न नहीं करता है तो बलों को संतुलित (balanced) कहा जाता है परंतु यदि यह समूह उस वस्तु में और अशून्य त्वरण उत्पन्न करें तो उन बलों को असंतुलित (unbalancrd)बल कहते हैं।
● जब कभी कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु की सतह पर चलने की चेष्टा करता है तब संपर्क में आने वाली शतकों के बीच घर्षण बल उत्पन्न हो जाता है जो हमेशा गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
● किसी वस्तु पर लगा बल वस्तु के द्रव्यमान और उसके तोरण के गुणनफल के बराबर होता है।
अर्थात
बल = द्रव्यमान × त्वरण
F=ma
m=द्रव्यमान a=त्वरण
● बल का si मात्रक न्यूटन(N) है वह बाल है जो 1kg द्रव्यमान की वस्तु में 1m/s2 का त्वरण उत्पन्न करता है अर्थात
1 N = 1kg m/s2
●किसी वस्तु के द्रव्यमान और इसके वेग के गुणनफल को उसका संवेग कहते हैं।
संवेग = द्रव्यमान × वेग (p=mv)
p= संवेग
V= वेग
● संवेग की दिशा वही होती है जो वस्तु के वेग की होती है।
● संवेग का si मात्रक kg m/s होता है ।
किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होता है तथा संवेग परिवर्तन की दिशा बलों की दशा में होती है।
●तृतिय नियम:- प्रतिक्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
● संवेग संरक्षण का सिद्धांत:- वस्तुओं के निकाय पर यदि वाह्य बल आरोपित ना हो तो उस निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।
● किसी वस्तु का द्रव्यमान(mass) उसके जड़त्व की संख्यात्मक माफ है।
● बल (force)वह कारक है जो किसी वस्तु पर लग कर उसमें त्वरण उत्पन्न करता है।
● बल को परिमाप और दिशा दोनों होती है अर्थात बाद एक सदिस राशि है।
● बल या बलो का समूह किसी बस्तु पर लग कर
(a)उसके चाल में परिवर्तन ला सकता है।
(b) उस वस्तु की गति की दिशा में परिवर्तन ला सकता है।
(c)उस वस्तु की आकृति (shape)सकता है।
● किसी कण पर लगे हुए दो या दो से अधिक बालों का परिणामी बल वह बल है जिसका उस कण पर प्रभाव दिए हुए पलों के सम्मिलित प्रभाव के समान होता है।
● यदि बलों का एक समूह किसी वस्तु पर लगकर उसमें कोई त्वरण उत्पन्न नहीं करता है तो बलों को संतुलित (balanced) कहा जाता है परंतु यदि यह समूह उस वस्तु में और अशून्य त्वरण उत्पन्न करें तो उन बलों को असंतुलित (unbalancrd)बल कहते हैं।
● जब कभी कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु की सतह पर चलने की चेष्टा करता है तब संपर्क में आने वाली शतकों के बीच घर्षण बल उत्पन्न हो जाता है जो हमेशा गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
● किसी वस्तु पर लगा बल वस्तु के द्रव्यमान और उसके तोरण के गुणनफल के बराबर होता है।
अर्थात
बल = द्रव्यमान × त्वरण
F=ma
m=द्रव्यमान a=त्वरण
● बल का si मात्रक न्यूटन(N) है वह बाल है जो 1kg द्रव्यमान की वस्तु में 1m/s2 का त्वरण उत्पन्न करता है अर्थात
1 N = 1kg m/s2
●किसी वस्तु के द्रव्यमान और इसके वेग के गुणनफल को उसका संवेग कहते हैं।
संवेग = द्रव्यमान × वेग (p=mv)
p= संवेग
V= वेग
● संवेग की दिशा वही होती है जो वस्तु के वेग की होती है।
● संवेग का si मात्रक kg m/s होता है ।
● न्यूटन के गति के नियम
● प्रथम नियम:- प्रतेक वस्तु अपनी विराम की अवस्था अथवा सरल रेखा में एक समान गति की अवस्था बनाए रखती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करें।
● द्वतिय नियम :-किसी वस्तु के संवेग के परिवर्तन की दर उस बस्तु पर लगे हुए बल के समानुपाती होता है और यह परिवर्तन उस बल दिशा में ही होता है।
अथवाकिसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होता है तथा संवेग परिवर्तन की दिशा बलों की दशा में होती है।
●तृतिय नियम:- प्रतिक्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
● संवेग संरक्षण का सिद्धांत:- वस्तुओं के निकाय पर यदि वाह्य बल आरोपित ना हो तो उस निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।

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