बात दिल की, Talk of the heart ,,, love
बात दिल की,,,
ज्ञान हमें ऊर्जावान बनाता है।परंतु ऊर्जा रिलीज करने के लिए मांस को डिक्रीज करना पड़ता है,जो व्यक्ति जितना ज्ञानी है ।वह इस दुनिया के सुख या दुख को सबसे ज्यादा जितना ज्ञान है, उतना अनुभव कर सकता है। परंतु मैं तो कहता हूं कि हमें संतुष्ट होने के लिए जितनी आवश्यकता है उतना में ही हम खुश रहे। क्योंकि मन का क्या है इसे जितना बढ़ाएं एक कभी रुकने वाला नहीं हो। चाहे वह ज्ञान का भूख हो या प्यार का भूख हो कभी मिटती नहीं बढ़ती चली जाती है।इंसान की जरूरत है, इंसान के दुख का कारण बनती है।
यह तो सभी जानते हैं कॉपीराइटेड है यह बात पर कभी-कभी तो समझ में नहीं आता कि क्या करें ज्यादा ज्ञान प्राप्त करें या सीमित रहें क्योंकि जितना ज्ञान प्राप्त करने से हम लाइफ को उतनी अच्छी तरह से समझ पाते हैं। और उतना ही ज्यादा दुख और सुख का अनुभव करते हैं और उससे ज्यादा सुख की अनुभव करने की आशा में अपने आप को हमेशा दुखी ही रखते हैं ।
दोस्तों मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूं जीवन क्या है क्या कोई व्यक्ति कम काम करके या ज्यादा काम करके अपने आप को संतुष्ट रखता है या खुश रखना चाहता है तो उसके लिए सही है या नहीं और हां यह तो मैं भी जानता हूं कि आज तक लाइफ को जितना आप समझना चाहेंगे शायद वह उतना ही कम है।
विज्ञान हमारे लाइफ को राइज अप करता है पर यह हमें नेचर से दूर कृत्रिम साधन पर आश्रित कर लाइफ को छोटी बनाती जा रही है इस दुनिया में हर चीज का विकास बहुत तेजी से हो रहा है और उसकी लाइफ भी कम होती जा रही है प्रत्येक वस्तु की उदाहरण के रूप में आप देख लीजिए पहले के मुकाबले आज के लोग बहुत कम ही जीते हैं और बहुत कम उम्र में बहुत ज्यादा उम्र वाले व्यक्ति का ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं स्वभाविक बात है जिसमें उसकी ऊर्जा अत्याधिक खर्च होती है और उसकी लाइफ छोटी हो जाती है।
आशा करता हूं कि आप मेरे बात को समझ पाए होंगे प्लीज अपना राय हमें आप कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद,,
Love you love
ज्ञान हमें ऊर्जावान बनाता है।परंतु ऊर्जा रिलीज करने के लिए मांस को डिक्रीज करना पड़ता है,जो व्यक्ति जितना ज्ञानी है ।वह इस दुनिया के सुख या दुख को सबसे ज्यादा जितना ज्ञान है, उतना अनुभव कर सकता है। परंतु मैं तो कहता हूं कि हमें संतुष्ट होने के लिए जितनी आवश्यकता है उतना में ही हम खुश रहे। क्योंकि मन का क्या है इसे जितना बढ़ाएं एक कभी रुकने वाला नहीं हो। चाहे वह ज्ञान का भूख हो या प्यार का भूख हो कभी मिटती नहीं बढ़ती चली जाती है।इंसान की जरूरत है, इंसान के दुख का कारण बनती है।
यह तो सभी जानते हैं कॉपीराइटेड है यह बात पर कभी-कभी तो समझ में नहीं आता कि क्या करें ज्यादा ज्ञान प्राप्त करें या सीमित रहें क्योंकि जितना ज्ञान प्राप्त करने से हम लाइफ को उतनी अच्छी तरह से समझ पाते हैं। और उतना ही ज्यादा दुख और सुख का अनुभव करते हैं और उससे ज्यादा सुख की अनुभव करने की आशा में अपने आप को हमेशा दुखी ही रखते हैं ।
दोस्तों मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूं जीवन क्या है क्या कोई व्यक्ति कम काम करके या ज्यादा काम करके अपने आप को संतुष्ट रखता है या खुश रखना चाहता है तो उसके लिए सही है या नहीं और हां यह तो मैं भी जानता हूं कि आज तक लाइफ को जितना आप समझना चाहेंगे शायद वह उतना ही कम है।
विज्ञान हमारे लाइफ को राइज अप करता है पर यह हमें नेचर से दूर कृत्रिम साधन पर आश्रित कर लाइफ को छोटी बनाती जा रही है इस दुनिया में हर चीज का विकास बहुत तेजी से हो रहा है और उसकी लाइफ भी कम होती जा रही है प्रत्येक वस्तु की उदाहरण के रूप में आप देख लीजिए पहले के मुकाबले आज के लोग बहुत कम ही जीते हैं और बहुत कम उम्र में बहुत ज्यादा उम्र वाले व्यक्ति का ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं स्वभाविक बात है जिसमें उसकी ऊर्जा अत्याधिक खर्च होती है और उसकी लाइफ छोटी हो जाती है।
आशा करता हूं कि आप मेरे बात को समझ पाए होंगे प्लीज अपना राय हमें आप कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद,,
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